Banks की नाराजगी के बावजूद 31 August से आगे बढ़ाई जा सकती है लोन चुकाने में दी गई छूट की अवधि

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लोन मोरेटोरियम की सुविधा 31 अगस्त को समाप्त होने की आशंका से लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें अभी से दिखाई दे रहीं हैं | कोरोना और लॉक डाउन के चलते आर्थिक मंदी की मार झेल रहे ग्राहकों की परेशानियों को देखते हुए वित्त मंत्रालय  31 अगस्त के बाद भी लोन चुकाने में छूट की अवधि को आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा है | इसके लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं | हालांकि बैंकर्स वित्त मंत्रालय के इस विचार का विरोध कर रहे हैं |

मुश्किल में उद्योग संगठन-

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जानकारी देते हुए बताया कि,  लॉकडाउन की वजह से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को इस साल 90,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। यह बात उन्होंने उद्योग संगठन फिक्की ( FICCI ) के एक कार्यक्रम के दौरान कही |

वहीं भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन राकेश भारती मित्तल ने भी आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ एक बैठक के दौरान स्थगन का विस्तार करने की मांग की थी | उन्होंने कहा था कि, अगर आगे भी ये सुविधा नहीं दी गई, तो इस वर्ष एनपीए की सूची में शामिल होने वाली कंपनियों की संख्या पहले से ज्यादा होगी।

बैंकों के लिए समस्या-

वित्त मंत्रालय के इस निर्णय पर विचार विमर्श करने पर एसबीआई, एचडीएफसी सहित लगभग सभी बैंकर्स ने विरोध जताते हुए कहा है कि, सरकार द्वारा कर्ज स्थगन को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए | क्योंकि, जो लोग भुगतान कर सकते हैं वे भी इस अधिस्थगन का लाभ उठा रहे हैं। एसबीआई के तिमाही नतीजों के बारे में बताते हुए चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि जिन 9.5 फीसदी खाताधारकों ने अधिस्थगन का लाभ उठाया था, उनमें से बैंक द्वारा किए गए खातों की जांच के आधार पर 5.2 फीसदी कॉर्पोरेट इकाइयां थीं, जो सितंबर से ऋण सेवा देने की स्थिति में थीं।

एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने भी  कर्ज स्थगन को आगे नहीं बढ़ाने की बात कही है | कोरोना संकट काल में कई लोग ऐसे भी हैं जिनकी नौकरी चली गई है या फिर सैलरी में कटौती कर दी गई है | इसके अलावा कुछ लोगों ने उस कारोबार के लिए लोन ले रखा है, जो अब ठप हैं,  ऐसे लोगों ने EMI मोरेटोरियम की सुविधा का लाभ उठाया हैं | इसके जरिए उन्हें मासिक किस्‍त टाल कर पैसे की तात्‍कालिक किल्‍लत से निजात मिल गई | लेकिन जिन लोगों की आय पर फर्क नहीं पड़ा, उन्होंने भी अपनी ईएमआई समय पर नहीं दी, जिससे अब खुद बैंकों के सामने मुश्किल कड़ी हो रही है |

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