अब बताना होगा की आप जो सामान बेच रहे है वो कहा बना हुआ है ‘मेक इन इंडिया ‘ और ‘आत्मनिर्भर भारत ‘ को सफल करने के लिए।

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भारत और चीन कि सीमा के तनाव की बात पर केंद्र सरकार ने लिया एक बढ़ा कदम। केंद्र सरकार ने सभी मौजूद सरकारी portal -eCommerce portal पर बिकने वाले सारे प्रोडक्ट के लिए ‘Country of Origin’ बताना अनिवार्य किया है।  यह बताया जा रहा है कि इस फैसले से चीनी कंपनियों को काफी नुक्सान का सामना करना पड़ सकता है।  

जानकारी यह भी प्राप्त हुई है कि केंद्र सरकार ने अपनी सभी suppliers के लिए भी यह ‘कंट्री ऑफ़ ओरिजिन’ अनिवार्य किया है उसी के साथ यह भी कहा कि किसी भी Government पोर्टल पर देशी प्रोडक्ट को ही तरजीह दी जाए

कॉमर्स की मंत्री ने कहा  – “विक्रेता जिन्होंने इस GeM फीचर से पहले ही अपने प्रोडक्ट पहले से ही डाल दिए है उन्हें नियमित तौर पर याद दिलाया जाएगा की वे अपनी कंट्री ऑफ़ ओरिजिन शामिल कर दे। इसके साथ अगर उन्होंने यह अपडेट नहीं किया तो उन्हें चेतावनी भी दी जायेगी उनके products को हटाने की । केंद्र सरकार ने एक बढ़ा कदम अपने दो अभियान को आगे बढ़ाने और सफल करने के लिए उठा लिया है – ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत‘।”

GeM में ‘मेक इन इंडिया’ का Filter भी उपलब्ध। 

जी हाँ अब GeM (गवर्नमेंट इ-मार्किटप्लेस) ने एक ‘मेक इन इंडिया’ फ़िल्टर भी उपलब्ध कर दिया है – ताकि जनता या कहे users जान पाए लोकल products कहा बने है। इसके कारण लोग चीन में बने प्रोडक्ट कम खरीदेंगे और मेक इन इंडिया प्रोडक्ट्स ज्यादा .

चीनी कंपनियों को होगा बहुत नुक्सान। 

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारों के विभाग और दफ्तर इस इ-कॉमर्स पोर्टल के द्वारा अपनी जरूरतमंद के प्रोडक्ट और सर्विस आर्डर करते है जैसे कि स्टेशनरी, क्राकरी, फर्नीचर, सांइटिज़ेर, आदि।  इस पोर्टल में १७ लाख प्रोडक्ट्स उपलब्ध है।  अगर इसमें देशी उत्पादों की तरजीह दी जायेगी तो इसका सीधा असर चीनी कंपनियों पर पड़ेगा। नए फैसले और इस मेक इन इंडिया वाले नए फ़िल्टर के बाद अब सरकारी पोर्टल में सिर्फ मेक इन इंडिया के ही उत्पाद ऑफर होंगे। 

GeM पोर्टल अब खरीदारों को class I के लोकल आपूर्तिकाओ के लिए किसी भी कीमत को आरक्षित करने की अनुमति देगा – जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक भारतीय लोकल सामग्री है। नियमों के अनुसार – 200 करोड़ रुपये से कम की कीमत के लिए, केवल class I और class II – जिनकी 20 प्रतिशत से अधिक लोकल भारत की सामग्री है – वे इस बोली लगाने के पात्र हैं।

CAIT ने 15 जून के दिन कॉमर्स मंत्री को यह मांग की। 

CAIT के सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा – “ज्यादातर ई-कॉमर्स कंपनियां इन पोर्टल्स पर चीनी सामानों को बड़े प्रतिशत में बेच रही हैं और बिना कंट्री ऑफ़ ओरिजिन – ग्राहक देश की उत्पत्ति के बारे में जानते ही नहीं हैं और वही खरीद लेते है जो निश्चित रूप से उपभोक्ताओं की पसंद को प्रभावित करता है। “ 

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