Banks में बढ़ता पारंपरिक निवेश बढ़ा सकता है डेब्ट फंड पर मुश्किलें

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शेयर मार्केट में रोजाना गिरावट देखी जा रही है और डेब्ट Mutual Funds पर भी संकट बढ़ सा गया है | इसे देखते हुए निवेशक भी अपना रुख बैंक की और कर रहे हैं | बैंक्स के अधिकारीयों ने बताया है कि निवेशों में बढ़ते जोखिम को देखते हुए लोग अब पारंपरिक जमा योजनाओं की तरफ लौट रहे हैं | कुछ समय से इसमें काफी उछाल दिख रहा है |

फ्रैंकलिन टेम्पलटन के द्वारा पिछले दिनों 6 योजनाओं को बंद कर दिया गया था | इसकी वजह से निवेशक असमंजस की स्थिति में आ गए | 28,000 करोड़ की रकम इस फंड हाउस में फसने का खतरा अब निवेशकों को सताने लगा है इसलिए सरकार के कहने के बावजूद यहाँ से फंड्स की निकासी हो रही है | सुमंत कठपालिया (CEO, इंडसइंड बैंक) के अनुसार जो रकम म्यूचुअल फंड्स से निकल रही है वह बैंकों में जमा हो रही है इसलिए जमा दर का ब्याज घटाया गया है | ज्ञात हो कि फ्रैंकलिन टेम्पलटन के फैसले की वजह से निवेशकों ने 1.95 करोड़ रुपयों को निकला है |

बैंक्स ने 2000 करोड़ से की म्यूचुअल फंड की सहायता-

हाल ही में RBI ने स्पेशल फंड्स की व्यवस्था की थी जो म्यूचुअल फंड्स के लिए की गयी थी | इसके तहत बाँक्स ने 2000 करोड़ पहले दिन में ही ले लिए हैं | रेपो रेट की मौजूदा दर पर यह राशि प्रदान की गयी है |

भारतीय रिज़र्व बैंक ने सूचना प्रदान करते हुए कहा कि MF के लिए पचास हज़ार करोड़ रुपयों का एलान सोमवार को हुआ और अगले ही दिन बैंक्स 2000 करोड़ रुपयों को ले लिया है |

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