Ramayan में कोरोना और चमगादड़ कि कहानी के पीछे का सच!

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यह सब जानते है कि काकभुशुण्डी गरूड़ को सात प्रश्नों के उत्तर दे रहे होते है रामचरित मानस के उत्तर काण्ड में वहां कोई ‘चमगादड़’ शब्द देख लिया। और वही पर काम, क्रोध, लोभ, आदि बीमारियाँ पायी गई है तो वही पर ‘रोग’ शब्द भी देखा गया। आज यह कहानी इसलिए याद आयी क्योंकि दावा किया जा रहा है की कोरोना वायरस का पहले से ही रामचरित मानस में लिखा और चेतावनी दी गई है। तो आखिर सच क्या है? 

देश में आज जानलेवा कोरोना वायरस का संक्रमण हर जगह फेल चूका है और उसके लिए अजीबो गरीब दावे भी किये जा रहे है। अब कोरोना वायरस को लेके यह दावा भी किया जा रहा है जो बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है और दावा यह है – 

“रामचरित मानस में पहले से ही इस वायरस की जानकारी और चेतावनी दी गई है”। दरअसल रामचरित मानस के दोहा नंबर १२० में यह लिखा है – 

“जब जब पृथ्वी पर नींदा बढ़ेगी, तब तब चमगादड़ अवतरित होंगे और चारो और उनसे सम्बंदि बीमारी फैलेगी और लोग मर जयेगे।”

दोहा नंबर १२१ में लिखा है – 

“एक बीमारी जिसमे नर मरेंगे, उसकी सिर्फ एक ही दवा होगी, प्रभु के भजन, दान, और समाधी में रहना मतलब लॉकडाऊन”। 

परन्तु सच क्या है?

परन्तु सच यह है की रामचरित मानस के उत्तर काण्ड में चौपाई दी है किन्तु उसका भाव भिन्न है। खग भुशुण्डि और रोग के बिच जो संवाद हुआ था वह रामचरित मानस में दिया हुआ है।

उस संवाद का मतलब है की जो सबकी आलोचला करता है वैसा इंसान जब शरीर छोड़कर जाता है तो वह उसके दूसरे जन्म में चमगादड़ में अवतरित होता है। जानिए पूरी कहानी खग गरूड़ और रोग के बिच का संवाद।

अधिकाँश हिन्दुओ कि रामचरित मानस में श्रध्दा है परन्तु उन्होंने इसे पूरा पढ़ा ही नहीं। केवल एक दोहा में चमगादड़ और रोग जा ज़िक्र का यह मतलब सोशल मीडिया में वायरल कर दिया गया है। जिसने पूरा पढ़ा है उन्हें ज्ञात है कि काम को वायु, लोभ को कफ और क्रोध को पित्त का नाम देकर कहा गया है – यह बढ़ने से रोग होता है। सबकी नींदा करने वालो का अगला जन्म चागादड के रूप में होगा। यह दावा गलत है कि कोरोना वायरस का पहले से स्मरण रामचरित मानस में है।

क्या है पूरी कहानी? खग ही जाने खग कि भाषा?

हिंदी का यह प्रचलित मुहावरा सभी ने सुना ही होगा – “खग ही जाने खग की भाषा”। आम तोर पर जब इसे इस्तेमाल तब करते है जब दो व्यक्ति बात तो सभी के सामने कर रहे होते है किंतु उसका अर्थ सिर्फ वही दो व्यक्ति समझ रहे हो। वह उपस्थित बाकी के लोगो के लिए उसका कोई अर्थ ही नहीं निकलता है।

जो लोग संवाद जैसे बातचीत या मास कम्युनिकेशन आदि विषय पढ़ते है, उन्होंने कही न कही अध्याय में टार्गेटेड कम्युनिकेशन के नाम से जानते होंगे। जासूसी फ़िल्मो के प्रेमी ने देखा होगा की वे लोग कैसे चिट्ठी भेजते है जो दिखती है आम है परन्तु उसमे कोई रहस्य छुपा होता है या कोई सन्देश निकलता है।

रामचरित मानस को दो अलग अलग जगहों पर दो लोगो के संवाद को याद रखके लिखा गया है। जैसे आप इसके शुरुआत का अध्याय देखे तो वह शिव पारवती के बिच का संवाद का है। और उसका आख़िरी हिस्सा काकभुशुण्डी और गरूड़ के संवाद का है। उसमे होता यह है की गरूड़ जी राम जी की कथा सुन्ना और समझना चाहते थे किंतु खुद भगवान भी उन्हें समझा नहीं पाए थे।

और फिर उन्होंने निर्णय किया की कोई भी पक्षी यानी खग ही गरूड़ को रामकथा समझा पायेगा। और इसलिए गरूड़ को काकभुशुण्डी जी के समक्ष भेजा गया था रामकथा सुनने और समझने के लिए। तब कहा गया है – “खग ही जाने खग की भाषा”। 

दावा आखिर सही या गलत?

यह दोनों अलग है कोरोना वायरस का कोई ज़िक्र रामचरित मानस में नहीं दिया गया है। सोशल मीडिया में वायरल हुआ यह दावा गलत है।

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