गरीबी से लड़के लंग कैंसर विशेषज्ञ बनने वाले डॉ. दिगंबर बेहरा पद्मश्री से आभूषित

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खबरतक, चंडीगढ़, 25 जनवरी 2020
इस वर्ष पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा हुई और इस बार भी पीजीआई डिपार्टमेंट का नाम आ ही गया | इस बार पल्मोनरी डिपार्टमेंट के डॉ. दिगंबर बेहरा को भारत के तीसरे सर्वोच्च सम्मान के लिए चुना गया है | डॉ. दिगम्बर पल्मोनरी विभाग के पूर्व एचओडी हैं और उनको पद्मश्री टी. बी. व लंग्स कैंसर के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया जा रहा है | उन्होंने बताया कि उनके लिए यह सम्मान बहुत ही बहुमूल्य है क्यूंकि गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले ही उनका नाम इस सूची में आया है |

डॉ. बेहरा एक ऐसे परिवार से आते हैं जहाँ उनके माँ और पिता दोनों ही अनपढ़ थे और बचपन बेहद गरीबी देखी है | पर उनके माता पिता उन्हें पढ़ा लिखाकर एक बड़ा इंसान बनाना चाहते थे | उन्होंने यह भी बताया कि जब तक उन्होंने हाई स्कूल की पढ़ाई की तब तक उनके पास पहनने के लिए जूते तक नहीं थे | जूते भी तब मिले जब डॉ. बेहरा पढाई पूरी करने के बाद गाँव से शहर आये | डॉ. बेहरा ओड़िसा से हैं और उन्होंने बताया कि सन 1978 में परीक्षा में शामिल होने के लिए वे पीजीआई चंडीगढ़ आये थे | मौसम काफी ठंडा था उस समय और मेरे पास कोट था नहीं तो मैंने अपने जूनियर से कोट उधार लिया और उसे पहनकर आया था | उस वक़्त मुझे कुछ भी पता नहीं था पर पीजीआई में आने के बाद मानो वक़्त बदल सा गया था | मैं अपनी मेहनत से आगे बढ़ता चला गया | ये बात भी उन्होंने साझा की |

गौर फरमाने वाली बात यह भी है कि उन्हें कई बार टीबी जैसी जघन्य बीमारी पर कार्य करने के लिए सम्मान प्राप्त होते रहे हैं | पर वे अपनी इस उपलब्धि के लिए कहते हैं कि मैं सिर्फ एक मामूली सा डॉक्टर हूँ | पर सच यह है कि डॉ. बेहरा के बेहतरीन काम कि वजह से उन्हें पीजीआई से रिटायरमेंट के बाद भी भारत सरकार से दो साल एक्सटेंशन मिला और इसकी सिफारिश स्वयं पीजीआई से आई थी |

ए. पी. जे. अब्दुल कलाम से भी प्राप्त कर चुके हैं सम्मान-
डॉ. बेहरा से बातचीत के दौरान ये भी पता चला कि उन्हें वैज्ञानिक एवं पूर्व राष्ट्रपति रह चुके डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम से भी सम्मान प्राप्त हो चुके हैं और वो भी दो बार | उन्होंने बताया कि जब मैं दूसरी बार सम्मान लेने गया तो राष्ट्रपति ने मुझसे काफी बात की और मुझसे जुडी हर जानकारी को प्राप्त किया | आईसीएमआर पुरुस्कार भी डॉ. बेहरा को तीन बार प्राप्त हुआ है और करीब 28 राष्ट्रीय व 7 अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार प्राप्त हो चुके हैं | पल्मोनरी मेडिसिन पर उनके द्वारा लिखी किताब को विद्यार्थी पढ़ते हैं और साथ ही करीब 475 पेपर प्रकाशित किये जा चुके हैं | सन 1980 से लंग कैंसर की क्लिनिक पीजीआई में चलने वाले डॉ. बेहरा ने बताया कि वह 10000 से ज्यादा मरीजों का इलाज कर चुके हैं | नेशनल टीबी सेन्ट्रल प्रोग्राम में चेयरमैन के रूप में पदभार भी संभाला है |
अंतिम शब्दों में उन्होंने कहा कि मैं पीजीआई का बोहत आभारी हूँ जो भी सीखा यहाँ से सीखा है और यहाँ से सहकर्मियों का भी दिल से अभिवादन करता हूँ |

मुझे पीजीआई ने बहुत कुछ दिया है। पीजीआई एक समंदर है, जितना उसमें डूबेंगे, उतना ज्ञान आपको मिलेगा। इस अवार्ड के लिए मैं पीजीआई, अपने सहकर्मी और मरीजों का आभार व्यक्त करता हूं। -प्रो. डी बेहरा, पूर्व एचओडी पल्मोनेरी डिपार्टमेंट चंडीगढ़

यह पीजीआई के लिए बहुत बड़ा सम्मान है। डॉ. बेहरा ने लंग्स कैंसर पर काफी काम किया है। उनकी बदौलत संस्थान का पल्मोनरी डिपार्टमेंट आज ऊंचाइयों पर है। न सिर्फ भारत में बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर इस डिपार्टमेंट की अपनी एक साख है। -प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई

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