Delhi से भारतीय श्रमिक गए और रोहिंग्या बंगलादेशी आये आखिर क्या है इसका मतलब ?

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अगर अब दिल्ली में किसी मजदूर की ज़रूरत पड़ेगी तो भारतीय मजदूर मिलना मुश्किल होगा | जी हाँ, रोहिंग्यों बंगलादेशी मजदूर ही मिलेंगे और इनसे काम करवाना आपकी मजबूरी होगी | फैक्ट्री हो या फिर घर हर जगह बस इन्हें ही काम मिलेगा और आप पैसे भी इन्हें ही देंगे | ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय श्रमिक यहाँ से पलायन कर जा चुके हैं | केजरीवाल सरकार ने ये कारनामा कर दिखाया है क्योंकि ज़्यादातर मजदूर बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों से यहाँ आये थे और सरकार ने उनके घरों की बिजली एवं पानी को रोकना शुरू कर दिया |

 

इन मजदूरों के पास खाने के लिए कुछ नहीं बचा और सरकार ने दावा किया कि इन्हें राशन दिया गया है पर असलियत में वह राशन कभी उन तक पहुंचा ही नहीं | यह दांव इसलिए खेला गया क्योंकि दिल्ली से सारे भारतीय श्रमिकों को हटाना था और ठीक वैसा ही हुआ | कोरोना सोने पे सुहागा अवसर ले आया और सारे श्रमिक अपने अपने राज्यों में वापस चले गए | इसका ठीक उल्टा रोहिंग्या बांग्लादेशियों के साथ हुआ उन्हें हर सुविधा एवं राशन प्रदान किया गया और उनके आधार कार्ड भी बनवा दिए गए गलत तरीके से |

 

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में सरकार द्वारा 5.2 एकड़ भूमि का इस्तेमाल किया गया है जिसमे सारे रोहिंग्यों के रहने की व्यवस्था की गयी है | इसका मतलब साफ़ है कि दिल्ली में 5.2 एकड़ भूमि कब्ज़े के अधीन हो गयी | भारतीय मजदूर गए और रोहिंग्यों को सरकार का सहारा मिल गया | गौरतलब है कि 18 मई से दिल्ली में बाज़ार खुल गया है और लेबर की ज़रुरत हर किसी को होगी तो रोहिंग्यों के लिए रोज़गार के दरवाज़े भी खुल गए | केजरीवाल सरकार का यह पैंतरा बिलकुल सटीक था और कामयाब भी हो गया |

 

ऐसा बताया जा रहा है कि भारतीय श्रमिक अब दिल्ली वापस नहीं लौटेंगे क्योंकि उनके प्रति सरकार का व्यवहार बिलकुल सही नहीं था | पर अब रोहिंग्या बांग्लादेशियों की संख्या में तेज़ी से इजाफा होगा और यह सब सरकार पर निर्भर हो जायेंगे | एक अलग बांग्लादेश दिल्ली में बसने के आसार नज़र आ रहे हैं |

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