23 साल के इस शहीद जवान ने चीनी सैनिको को पटक पटक के मार गिराया – गुरतेज सिंह का बलिदान हिन्दुस्तान कभी नहीं भूलेगा।

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गुरतेज सिंह 23 वर्ष के थे और कुछ 2 साल पहले ही भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनको ट्रेनिंग के बाद लदाख की सीमा पर ड्यूटी दी गई थी। जब वह 16 बिहारी सैनिक वह पहुंचे तो उन्होंने गुरतेज को अकेले 4 चीनी सैनिको को पकड़ के पटक के चोटी से निचे गिराया था। और अकेले उन्होंने 12 चीनी सैनिको को मार गिराया है। और वे अब तक हमारे बिच ही रहते यदि उनका पैर फिसलता नहीं। 

उनको किसी भी हमले ने मारा नहीं था। 

गुरतेज सिंह जब चीनी सैनिको को चोटी से निचे गिरा रहे थे तब अचानक से उनका पैर फिसल गया और वे भी गिर गए जिससे वे शहीद हो गए। हिंदुस्तान उनका बलिदान कभी नहीं भूलेगा। – गर्व है उन पर।

उन्होंने मरते डीएम तक चीनी सैनिको को मारा है। यह नौजवान गुरतेज सिंह बचपन से ही भारतीय फ़ौज में भर्ती होना चाहते थे और देश की सेवा करना चाहते थे। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद उन्होंने संकल्प किया था कि वे देश को अपना जीवन समर्पित करेंगे और देश की सेवा करेंगे। किन्तु उसकी शहीद होने के बाद उनके पिता और परिवार टूट सा गया। बिना हथियार के इस शहीद जवान गुरतेज सिंह ने अकेले १२ चीनी सैनिओ को मार गिराया था।

भारत चीन के सीमा पर हुई झड़प में मानसा का जवान हुआ शहीद। अपनी ट्रेनिंग के बाद पहली बार लदाख में आए ड्यूटी के लिए। 

भारत चीन की सीमा पर पूर्वी लदाख की गलवान घाटी में चीन के सैनिको के साथ हुई थी हिंसक लड़ाई जिसमे बीरे वाला के डोगरा गांव का 23 वर्षीय जवान गुरतेज सिंह भी शहीद हुए है। तीनो भाइयो में से सबसे छोटे गुरतेज सिंह कुछ 2 साल पहले ही भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। अपनी फौजी ट्रेनिंग खत्म करने के बाद पहली बार लदाख रेजिमेंट में ड्यूटी के लिए लगे थे। 

गुरतेज सिंह शहीद हुए सोमवार की उस रात्रि को जहा चीन के सैनिको ने धोखे से किया था नुकीले हथियारों से भारतीय सेना पर हमला । इसके पश्चात भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। इनमे से एक थे मानसा जिले के डोगरा गांव के गुरतेज सिंह। आखरी बार अपने पिता से बात भी नहीं कर पाए। 

बचपन से होना चाहते थे भारतीय सेना में भर्ती। 

गुरतेज सिंह के माता प्रकाश कौर और पिता विरसा सिंह ने बताया कि उनके इस बेटे गुरतेज सिंह को बचपन से भारत सेना में भर्ती होने कि इच्छा थी। भर्ती होने के बाद उन्होंने संकल्प लिया था देश की सेवा करने का। पिता की बात अपने पुत्र गुरतेज सिंह से मृत्यु के 20 दिन पहले हुई थी|  कुछ दिन पहले उन्होंने बात करनी थी किन्तु बात हो नहीं पाई। आखरी बात पिता से 20 दिन पहले हुई तब गुरतेज ने कहा था कि वे जल्दी आएंगे उनके भाई गुरप्रीत की शादी में और अपनी भाभी से भी मिलेंगे। ऐसे उनके बेटे से आखरी बार बात करने की इच्छा भी मन में अधूरी ही रह गई। 

पिता विरसा सिंह ने कहा कि – गुरतेज केवल उनका नहीं देश का बेटा था – हमेशा गर्व रहेगा। 

मनसा के नेहरू कॉलेज के प्रोफेसर अम्बेश भरद्वाज ने बताया कि – गुरतेज कॉलेज में PIT केंद्र में नॉन मेडिकल के विद्यार्थियों में सबका चहीता था।  गुरतेज सिंह पर उन्हें गर्व है। मनसा के नवनियुक्त DC महेंद्र पाल गुप्ता और एसएसपी डॉ नरिंदर भार्गव ने अपना दुःख साझा किया शहीद गुरतेज सिंह के परिवार के साथ। 

मनसा जिले के डोकरा गांव के रहने वाले शहीद गुरतेज सिंह के परिवार के पास 3 एकड़ ज़मीन है – उनके 3 भाई और माता पिता के साथ वे रहते थे। गुरतेज सिंह सबसे छोटा था और कुछ ही वर्ष पहले भर्ती हुए थे भारतीय सेना में। 

गुरतेज सिंह पर पुरे पंजाब ही नहीं बल्कि पुरे हिंदुस्तान को गर्व है।

23 वर्ष के यह जवान गुरतेज सिंह ने बेहद ही अच्छे तरीके से इस धोकेबाज़ी हमले का मुहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने अकेले 12 चीनी सैनिको को पटक पटक के मार गिराया था वो भी बिना हथियार के। 4 चीनी सैनिको को वे अकेले पकड़ के खड़े थे ऐसा देखा गया था और एक एक करके उन्हें चोटी से निचे फेंक दिया। किन्तु चीनी सैनिको को मारते समय उनका पैर उस चोटी से फिसल गया और वे गिर गए जिसकी वजह से उनकी मृत्यु हो गई। चीन के हमले से वे नहीं हुए थे शहीद। 

उनके भाई कि ३ दिन पहले शादी थी जिनमे वे शामिल नहीं हो पाए। 

3 दिन पहले ही गुरतेज के भाई कि शादी हुई है किन्तु चीन भारत के सीमा के तनाव कि वजह से गुरतेज सिंह उनकी शादी में शामिल नहीं हो पाए। सोमवार कि रात्रि चीन के धोकेबाज़ी वाले हमले में 20 जवानो में एक नाम गुरतेज सिंह का है। गुरतेज सिंह के शहीद की खबर सुनने के बाद केवल गांव और मनसा जिले में ही नहीं बल्कि पुरे पंजाब में गुरतेज की मौत के शोक का माहौल है। 

शहीद होने की खबर के बाद परिवार टूट गया। 

गुरतेज सिंह के शहीद होने की खबर फ़ोन के ज़रिए उनके पिता को दी गई जिसे सुनने के पश्चात पूरा परिवार टूट गया। माता प्रकाश कौर हो गई बेहोश। गुरतेज के भाई के शादी का माहौल गम में छा गया। यह खबर आग की तरह गांव में फ़ैल गयी। गांव के पांच का कहना है कि गुरतेज के मृत देह के आने के बाद अंतिम संस्कार किया जायेगा। पुरे गांव के लोगो ने गुरतेज के परिवार को सांत्वना दी। 

उनका अंतिम संस्कार किया गया उन्ही के गांव में आदर के साथ। हिंदुस्तान उनका बलिदान कभी नहीं भूलेगा।

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